हरियाणा के हिसार में दो दिनों से रुक-रुक कर हुई ओलावृष्टि एवं बरसात से जिले में फसलों को भारी नुकसान हुआ है। सर्वाधिक नुकसान का सामना तलवंडी राणा में हुआ है। तलवंडी राणा में जहां सरसों एवं गेहूं की फसल में व्यापक नुकसान हुआ है, वहीं तलवंडी राणा के श्मशान घाट में सात एकड़ में लगी फूलों की क्यारियां अब वीरान हो गई हैं। इसके साथ ही धरती को गुलजार करने की इस मुहिम को भी भारी झटका लगा है।

प्रदेश में गर्मियों एवं सर्दियों के मौसम के पौधे निशुल्क वितरित करने की कड़ी में ऑक्सीजन जोन विलेज तलवंडी राणा में ईन दिनों गेंदा, डेलिया, आइस, करन डोला, पीली सरसों, आयरस, प्लक, फ्लोक्स, स्वीट विलियम, कॉसमॉस, कैलेन्डूला, डेजी, स्टॉक, वॉल फ्लावर, पॉपी, कैलिफोर्निया पॉपी, नगरेट, लीफ वॉल फ्लावर, चांदनी, चांदी टफ, डहेलिया, पंजी, वरबीना, डिपोरिया, गजेनिया, जेरेनियम, स्टाक, आस्टर, डैफोडिल, फ्रेशिया जैसे पौधे के फूल बहुत अधिक मात्रा में खिले हुए थे। मगर ओलावृष्टि के कारण श्मशान घाट में लगी इन फूलों की क्यारियां लगभग तबाह ही हो गई है।

तबाही का आलम यह है कि पेड़ों की सफेदी खराब होने से लेकर अधिकांश पौधों की टहनियां तक टूट कर बिखर गई हैं। तलवंडी राणा समिति के उपाध्यक्ष सारदूल वर्मा के अनुसार ओलावृष्टि से अगली फूलों की फसल के लिए उगाए गए बेहतरीन फूलों के बीज के लिए उगाई गई फसलों का बड़ा हिस्सा भी खराब हो गया है।
राज्यभर के स्कूलों, पंचायतों व संस्थाओं नि:शुल्क बांटते थे पौधे:-

धरती को गुलजार करने की इस मुहिम के तहत प्रत्येक वर्ष सर्दियों से पहले अलग-अलग जिलों में बहुत सी किस्म के फूलों की बिजाई कर उनकी नर्सरी तैयार की जाती थी। उसके बाद अप्रैल में गर्मियों के एवं दिसंबर में सर्दियों के पौधे प्रदेश भर के स्कूलों, गांवों, पंचायतों व अन्य शिक्षण व दूसरे प्रकार के संस्थाओं को नि:शुल्क वितरित किए जाते रहे हैं।
प्रत्येक वर्ष वितरित होते थे 30 लाख फूलदार पौधे:-

तलवंडी राणा में बनी राह ग्रुप फाउंडेशन की नर्सरी में हिसार, जींद, भिवानी, कैथल व फतेहाबाद के क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष तीस लाख से अधिक पौधे वितरित होते थे। वर्ष 2024 के लिए तो पूरे प्रदेश में प्रत्येक वर्ष युवा क्लबों के माध्यम से एक करोड़ से अधिक फूलदार पौधे वितरित करने व लगाने का लक्ष्य तय किया गया था।