हरियाणा के हिसार में आईएएस नीरज कुमार ने परिवार पहचान पत्र से छेड़छाड़ करने वाले सीएससी सेंटर संचालकों के एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। एडीसी नीरज कुमार ने इस मामले की जांच करते हुए 7 आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट सहित 10 अलग अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। जिसके तहत 10 साल की सजा से लेकर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना है।
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हिसार एडीसी नीरज कुमार ने बताया कि परिवार पहचान पत्र में हरियाणा सरकार ने कुछ गतिविधियां प्रतिबंधित की है और उनका निपटान मुख्यालय द्वारा ही किया जाता है। परंतु सीएससी संचालक बैंक एकाउंट अपडेशन, व्यवसाय बदलना, रिहायश बदलना, फैमिली आईडी में परिवार को विभाजित करने का काम कर रहे हैं। परंतु पिछले कुछ समय से उकलाना में सीएससी
आपरेटर अमित कुमार विभाग द्वारा प्रतिबंधित मॉडयूल में छेड़छाड़ कर रहा था।
आरोपी फैमिली आईडी को बदलने के लिए लोगों से दो से तीन हजार रुपये वसूलते थे।अमित कुमार ने शूरती देवी का व्यवसाय कंस्ट्रक्शन वर्क किया गया। इसी फैमिली आईडी को विभाजित किया गया। जब अशोक कुमार की से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि अमित कुमार ने कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए तीन हजार तथा फैमिली आईडी को विभाजित करने के लिए दो हजार रुपये लिए थे।

अमित ने किए खुलासे
एडीसी ने शुरूआत में अमित कुमार से पूछताछ की तो उसने बताया कि पीपीपी में व्यवसाय बदलने का कार्य प्रभुवाला का सीएससी संचालक सुनील कुमार, प्रदीप सहारण, अमित बरवाला व सोनू नारनौंद द्वारा किया जाता है। अमित बरवाला से लेबर कॉपी का कार्य, सोनू नारनौंद से आईडी विभाजित का कार्य व प्रदीप श्योराण से कंस्ट्रशन वर्क का कार्य करवाता है।
आईडी में अलग करने बदलने का कार्य के लेते थे हजारो रुपये
सभी आरोपी खुद दलाल की भूमिका निभाते। सीएससी संचालक अमित खुद अमित बरवाला को लैबर कॉपी अप्रूव करवाने के बदले में 1500 रुपये देता था। जबकि लोगों से फैमिली आईडी अलग करवाने के लिए 1800 रुपये लेता था और वह 1500 रुपये आगे देता था। फैमिली आईडी को मैंबर से डिलीट करने के लिए वह लोगों से 700 रुपये लेता था और आगे 500 रुपये देता था। इस प्रकार से वे लोगों से पैसे वसूलते थे। यह गिरोह काफी समय से काम कर रहा था।
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क्रिड ने भी की जांच, गिरोह तक पहुंचना जरूरी
अमित द्वारा किए गए परिवार पहचान पत्रों में छेड़छाड़ पर क्रिड के अधिकारी अरूण महिंदरु ने जांच की तो पता चला कि कुछ पीपीपी में सुरेंद्र निवासी फतेहाबाद व सुनील कुमार निवासी प्रभुवाला द्वारा की जा रही है। इसलिए पूरी गैंग का खुलासा होना जरूरी है। परिवार पहचान पत्र से छेड़छाड़ के एवज में अलग अलग धाराओं के तहत आरोपियों को 10 साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही 50 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। कई धाराओं में तीन साल की सजा से लेकर 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।