नेक्सस गेन परियोजना के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) फिलींपींस, केंद्रीय मृदा लवण्ता अनुसंधान केंद्र (सीएसएसआरआई) करनाल एवं चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के वैज्ञानिकों की संयुक्त मीटिंग हुई, जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति एवं परियोजना प्रमुख प्रो. बी.आर काम्बोज ने की तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उप-महानिदेशक (शिक्षा) डॉ. आर.सी. अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कुलपति एवं परियोजना प्रमुख प्रो. बी.आर काम्बोज ने बताया कि हरियाणा में यह परियोजना करनाल, पानीपत, सोनीपत व यमुनानगर जिलों में धान की सीधी बिजाई द्वारा जल संरक्षण पर केंद्रित रहेगी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) फिलींपींस, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान केंद्र (सीएसएसआरआई) करनाल एवं चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के वैज्ञानिकों की भागीदारी रहेगी।इसके अंतर्गत धान की सीधी बिजाई का जिओ मेपिंग के माध्यम से उपयुक्त एरिया व इस तकनीक से किसानों द्वारा वास्तविक जल संरक्षण की मात्रा का आंकलन किया जाएगा।

ताकि तकनीक की पूरी जानकारी से किसानों को अवगत कराया जा सकें व इस तकनीक को जल संरक्षण के लिए उपयुक्त तरीके से इस्तेमाल में लाया जा सकें। इसके अलावा धान क्षेत्रों में फसल विविधिकरण के विकल्पों का आंकलन भी किया जाएगा। ताकि कृषि में जल की खपत को कम किया जा सके।
विशिष्ट अतिथि डॉ. आर सी अग्रवाल ने बताया कि यह शोध परियोजना समय की जरूरत है तथा इससे धान की सीधी बिजाई के बारे मे किसानों को सशक्त किया जाएगा। जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्लोबन वार्मिंग के दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक साबित होगा।
अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) फिलींपींस से परियोजना प्रमुख डॉ. वीरेंद्र कुमार ने बताया कि नेक्शस गेन परियोजना मध्य व पश्चिम एशिया, उत्तर अफ्रीका, पूर्वी व दक्षिण अफ्रीका तथा दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों में 5 नदी जलाशयों के क्षेत्रों में चल रही है। यह परियोजना सीजीआईएआर की एक बहु-लाभदायी पहल है। जिसका उद्देश्य चयनित ट्रांस-बाउंड्री नदी घाटियों में पानी, ऊर्जा, भोजन और परिस्थितिक तंत्र में लाभ प्राप्त करना है। सिस्टम सोच को मजबूुत करने के लिए अनुसंधान और क्षमता विकसित करके और विकास के लिए विश्लेषण और अनुसंधान के लिए उपकरण, दिशा-निर्देश, प्रशिक्षण और सुविधा प्रदान करना है।
अनुसंधान निदेशक डॉ. जीतराम शर्मा ने बताया कि इसके अंतर्गत कार्य करने के लिए अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) फिलींपींस ने विश्वविद्यालय को 35 हजार डॉलर बजट का आंबटन किया है। इस मीटिंग में परियोजना के अंतर्गत होने वाले शोध कार्यों की रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान फिलींपींस से परियोजना के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. प्रलोय, डॉ. अमित कुमार, डॉ. प्रकाशन, डॉ. जसबीर, डॉ. श्वेता, डॉ. पवन एवं डॉ. स्वतंत्र, सीएसएसआरआई से डॉ. आर.के. यादव, डॉ. सतेंद्र सिंह व डॉ. गजेंद्र यादव तथा विश्वविद्यालय से डॉ. राजबीर गर्ग केवीके पानीपत, डॉ. जितेंद्र बामल केवीके सोनीपत, डॉ. महासिंह केवीके करनाल व डॉ. संदीप रावल केवीके यमुनानगर, डॉ. दलीप बिश्नोई एवं डॉ. सुरेश कुमार आदि शामिल हुए।