चंडीगढ़। हरियाणा में मानसून के दस्तक देने से पहले खट्टर-सैनी सरकार (प्रशासनिक अमला) अलर्ट मोड पर आ गया है। प्रदेश के शहरों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब राज्य के आईएएस (IAS) और एचसीएस (HCS) अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर खुद जमीन पर नालों की सफाई व्यवस्था का रियलिटी चेक करेंगे।
मुख्य सचिव ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि मानसून की तैयारियां सिर्फ कागजी बैठकों या दफ्तरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। ग्राउंड जीरो पर काम दिखना चाहिए।

3 दिन का अल्टीमेटम: हर अफसर को नापना होगा 5 किमी का नाला
राज्य के 23 जिलों के सभी 87 शहरी स्थानीय निकायों में चल रहे सफाई अभियान की समीक्षा बैठक करते हुए मुख्य सचिव ने सभी नगर निगम आयुक्तों और उपायुक्तों को सख्त निर्देश दिए हैं। अगले तीन दिनों के भीतर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था का मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण (फिजिकल वेरिफिकेशन) करना होगा।
विशेष निगरानी अभियान के तहत हर एक आईएएस और एचसीएस अधिकारी को कम से कम 5 किलोमीटर लंबे नालों की जांच करने का जिम्मा सौंपा गया है।
पोर्टल पर अपलोड करनी होगी फोटो, लापरवाही पर ‘जीरो टॉलरेंस’
काम में पारदर्शिता रखने और खानापूर्ति रोकने के लिए सरकार ने डिजिटल पहरेदारी का इंतजाम किया है। निरीक्षण करने वाले अधिकारियों को मौके की विस्तृत रिपोर्ट, फोटोग्राफ और अपनी ऑब्जर्वेशन शहरी स्थानीय निकाय विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर लाइव अपलोड करनी होगी।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने दो टूक कहा, “मानसून पूर्व तैयारियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार की इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है। अधिकारी खुद संवेदनशील हॉटस्पॉट की पहचान करें, कमियों को पकड़ें और तुरंत उन्हें ठीक करवाएं।”
बैठक में ये रहे मौजूद
सफाई अभियान की इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के. मकरंद पांडुरंग सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार ने समय रहते कदम उठाए हैं ताकि इस बार जनता को जलभराव की समस्या से न जूझना पड़े।