चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए एक बड़ा फैसला लेते हुए नई ‘मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी (MOTP), 2026’ और ‘शिक्षक ट्रांसफर पॉलिसी (TTP), 2026’ को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इन नीतियों पर मुहर लगाई गई। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणियों और कर्मचारियों के फीडबैक को ध्यान में रखते हुए पुरानी नीतियों में कई अहम बदलाव किए गए हैं।

120 अंकों का नया फॉर्मूला, समझें गणित
अब ट्रांसफर के लिए कर्मचारियों की रैंकिंग 120 अंकों के समग्र स्कोर के आधार पर तय होगी। इसमें सबसे बड़ा बदलाव वेटेज में किया गया है:
आयु का महत्व घटा: पहले आयु को 75% वेटेज मिलता था, जिसे अब घटाकर 25% कर दिया गया है।
अनुभव को प्राथमिकता: ‘कैडर में अनुभव’ को नया पैरामीटर बनाया गया है, जिसे 25% वेटेज दिया जाएगा।
विशेष परिस्थितियों को बल: वास्तविक कठिनाइयों के लिए विशेष कारकों का वेटेज 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है।
कपल्स और बीमार कर्मचारियों को बड़ी राहत
नई नीति में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कई नए प्रावधान जोड़े गए हैं:
दंपति मामले (Couple Cases): सरकारी सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के लिए मेरिट अंक 5 से बढ़ाकर 10 कर दिए गए हैं। अब इसमें हरियाणा, चंडीगढ़ या दिल्ली में तैनात किसी भी सरकार के नियमित कर्मचारी शामिल होंगे।
गंभीर बीमारियों का दायरा बढ़ा: मेडिकल ग्राउंड पर छूट के लिए बीमारियों की सूची में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, बेहचेट रोग, और बोन मैरो/अंग प्रत्यारोपण जैसे मामलों को शामिल किया गया है।
रिटायरमेंट सुरक्षा: सेवानिवृत्ति के 1 साल पहले किसी भी कर्मचारी या शिक्षक का ट्रांसफर उनकी लिखित सहमति के बिना नहीं किया जाएगा।
क्या होगी पुरानी नीतियों का?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2026 की इन नीतियों के लागू होते ही वर्ष 2025 की सभी पुरानी ट्रांसफर नीतियां और उनके तहत चल रहे अभियान स्वतः ही बंद माने जाएंगे। अब सभी ट्रांसफर 2026 के नए निष्पक्ष और पारदर्शी मानदंडों के तहत होंगे।
प्रशासनिक सुधार पर जोर
कैबिनेट ने मानव संसाधन विभाग को जल्द से जल्द नए नियमों के तहत ट्रांसफर अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसमें ‘नोशनल श्रेणी’ (Notional Category) और वर्तमान कर्तव्य प्रभार (CDC) के मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य तकनीक के माध्यम से एक पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ प्रणाली विकसित करना है, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़े और कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी न हो।