स्थानीय राजकीय महिला महाविद्यालय में मंगलवार को अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में एक व्याख्यान शिविर का आयोजन किया गया।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ एलिजा कुंडू ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि भाषा भावों को संप्रेषित करने का साधन है। मातृभाषा में हम अपने भावों को सहजता से अभिव्यक्त करते हैं। जन्म के बाद बच्चा जिस प्रथम भाषा का प्रयोग करता है, वहीं मातृभाषा है। इसी भाषा से हम संस्कार एवं व्यवहार पाते हैं और इसी से जुडक़र हमारी संस्कृति को धरोहर के रूप में आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के व्याख्यानों का आयोजन समय-समय पर करते रहना चाहिए, जिससे छात्राओं का बौद्धिक विकास हो सके। छात्राओं ने व्याख्यान शिविर में अपने विचारों को भी सांझा किया।

अपने संबोधन में कुमारी मधु बाला ने छात्राओं को संबोधित करते हुए बताया कि व्याख्यान शिविर का मुख्य उद्देश्य छात्राओं में भाषाओं एवं सांस्कृतिक विविधता के प्रति जागरूक करना है। डॉ सुनीता देवी ने छात्राओं को अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम व संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने कहा अपनी मातृभाषा में रचित साहित्य को पढ़ने व समझने के लिए छात्राओं को अभिप्रेरित किया। इस अवसर पर सहायक आचार्य सुनीता, सुमन लता व रजनी उपस्थित रही।