वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के साथ ड्यूल डिग्री PhD प्रोग्राम के तहत हुआ सिलेक्शन; 18 महीने ऑस्ट्रेलिया में करेंगे रिसर्च
हिसार!
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) ने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग के क्षेत्र में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। विश्वविद्यालय के कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के पीएच.डी. शोधार्थी कृष्ण कन्हैया का चयन ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी (WSU) के साथ संयुक्त रूप से संचालित ड्यूल डिग्री पीएचडी कार्यक्रम के लिए हुआ है।
इस विशेष उपलब्धि के तहत शोधार्थी कृष्ण कन्हैया को ऑस्ट्रेलिया में रिसर्च करने के लिए पूरी ट्यूशन फीस माफी के साथ 35,188 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 30 लाख रुपये) प्रतिवर्ष की छात्रवृत्ति भी मिलेगी।
गन्ने की सिंचाई और भूजल पर करेंगे रिसर्च

कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. अजय कुमार वशिष्ट ने बताया कि कृष्ण कन्हैया इस प्रोग्राम के तहत ‘भूजल क्षरण पर गन्ना सिंचाई के प्रभाव को समझना: एक क्षेत्र-आधारित मॉडलिंग अध्ययन’ विषय पर शोध करेंगे। वे जून 2026 से दिसंबर 2027 तक कुल 18 महीने ऑस्ट्रेलिया में बिताएंगे। वहां उनका मार्गदर्शन प्रोफेसर बसंत महेश्वरी और डॉ. जेसन रेनॉल्ड्स करेंगे, जबकि हकृवि में उनके मार्गदर्शक प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डी. एस. बुंदेला हैं। कोर्स पूरा होने पर उन्हें दोनों विश्वविद्यालयों से पीएचडी की डिग्री मिलेगी।
खास बातें: स्कॉलरशिप और सुविधाएं
- पूरी ट्यूशन फीस माफ: ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के दौरान कोई शिक्षण शुल्क नहीं देना होगा।
- सालाना छात्रवृत्ति: प्रो-राटा आधार पर हर साल 35,188 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की आर्थिक मदद।
- दोनों विवि से डिग्री: कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने पर HAU और वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी दोनों से पीएचडी की उपाधि मिलेगी।
कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने दी बधाई
“यह चयन विश्वविद्यालय में चल रहे उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय अवसर वैश्विक शोध सहयोग को मजबूत करते हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि कृष्ण कन्हैया बेहतरीन प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय और देश का नाम रोशन करेंगे।”
इस अवसर पर स्नातकोत्तर शिक्षा अधिष्ठाता डॉ. रमेश कुमार, अंतरराष्ट्रीय मामलों की प्रभारी डॉ. आशा कवात्रा, ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा और डॉ. मंजूनाथ ने भी शोधार्थी को बधाई दी। कृष्ण कन्हैया ने अपनी इस सफलता का श्रेय विवि प्रशासन, अपने शिक्षकों और माता-पिता के मार्गदर्शन को दिया है।